भजन संहिता 117 मे क्या विशेषता है?

प्रभु की स्तुति हो।

भजन साइनहिता ११७ यहोवा परमेश्वर की महिमा और स्तुति का भजन है।

भजन संहिता के भजनो में यह एक सबसे छोटा भजन है, लेकिन इस में कई विशेषताय है।

भजनसंहिता ११७:१

हे जाति जाति  के सब लोगो यहोवा की स्तुति करो।  हे राज्य राज्य के सब लोगो , उसकी प्रशंसा करो। 

भजन संहिता 117 मे क्या विशेषता है
भजन संहिता 117 मे क्या विशेषता है?

Psalm 91 Book 

इस वचन में हम लोगो देख सकते है की दाऊद राजा अन्य जाति के लोगो को यह आवाहन कर रहा है की यहोवा परमेश्वर की स्तुति करो।

लेकिन उस समय केवल इस्रायली लोग ही यहोवा परमेश्वर की आराधना करते थे।

फिर दाऊद राजा अन्य जाति के लोगो को क्यों कह रहा है की यहोवा परमेश्वर की स्तुति करे ?

इस का कारण है की यहोवा परमेश्वर सारी सृष्टि का रचेता है।

उसने ही सारी दुनिया बनायी है और सारा संसार उसके अधीन है।

हम लोगो स्तुति तब करते है जब कोई अच्छा काम किया हो।

और सच में परमेश्वर ने बहोत बड़े बड़े और आश्चर्यकर्म किये है।

इसीलिए वह स्तुति के योग्य है।

आगे ऐसा लिखा है की हमे उसके प्रशसा करनी है क्यूंकि वह एकमात्र ऐसा परमेश्वर है जिसे प्रशास दी जा सकती है।

उसकी प्रशसा सारे उन भले कामो के लिए की जा सकती है जो की उसने हमारे लिए किये है।

भजन संहिता ११७ : २

क्योंकि उसकी करुणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है।  याह की स्तुति करो।  

भजन संहिता 117 मे क्या विशेषता है
भजन संहिता 117 मे क्या विशेषता है?

यहोवा परमेश्वर की करुणा सदा की है और इस वचन में ऐसा लिखा है के वह हमारे ऊपर प्रबल हुई है।

प्रबल होना मतलब पूरी तरीके से हावी होना।

अगर परमेश्वर के करुणा हमारी जिंदगी के ऊपर प्रबल हो गयी तोह हमे किसी भी बात की कमी घटी नही होगी।

परमेश्वर सारी जरूरतों को अपने स्वर्गीय भंडार से पूर्ण कर देगा।

वचन में आगे लिखा है की यहोवा की सच्चाई सदा की है।

सच्चाई हमेशा बनी रहने वाली है क्यूंकि परमेश्वर सत्य है और उसमे कोई भी झूठ  नहीं है।

सच को प्रकट होने के लिए चाहे कितना भी समय क्यों ना लगे लेकिन सच सामने आ ही जाता है और वह हमेशा के लिए बना रहता है।

इन सारी बातो के लिए हम हमेशा परमेश्वर की स्तुति करना है और उसके महिमा करनी है।

क्यूंकि वह स्तुति क योग्य परमेश्वर है।

प्रार्थना :

धन्यवाद स्वर्गीय पिता आपने हमे यह मौका दिया की हम लोग आप के वचन को सिख सके और उसपर मनन कर सके।  हमे सामर्थ देना के हम लोग आप की महिमा और स्तुति हमेशा करते रहे और आप को आदर देते रहे।  हमारे गुनाहो को माफ़ करना और हमे यीशु मसीह के पवित्र लहू से धोकर शुद्ध करना। आमेन।

समर्पण थोरात 

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